क्या अहंकार आत्मा को बाँध सकता है?
अहंकार परमात्मा को बाँधना चाहता है — दुर्योधन और श्रीकृष्ण से मिलने वाली सीख महाभारत केवल पांडवों और कौरवों के युद्ध की कथा नहीं है। यदि हम इसे अपने भीतर घटने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा की तरह देखें, तो इसके प्रत्येक पात्र में हमारे जीवन का कोई न कोई पक्ष दिखाई देता है। दुर्योधन को केवल एक व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय यदि हम उसे अहंकार का प्रतीक मानें और श्रीकृष्ण को परम सत्य, चेतना और विवेक का प्रतीक समझें, तो शांति-दूत के रूप में श्रीकृष्ण का हस्तिनापुर जाना एक बहुत गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। जब परमात्मा शांति का संदेश लेकर आता है महाभारत में युद्ध को रोकने के लिए श्रीकृष्ण शांति-दूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं। वे युद्ध नहीं चाहते। वे समझौते और धर्म के मार्ग से समस्या का समाधान चाहते हैं। लेकिन दुर्योधन का अहंकार सत्य को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। उसकी दृष्टि में सत्ता, अधिकार और अपना अहं ही सर्वोपरि था। यही अहंकार की प्रकृति है। जब हमारे भीतर अहंकार प्रबल होता है, तो सत्य हमारे सामने उपस्थित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं कर पाते। अहंकार की सबसे बड़ी...