स्थिरता से गहराई की ओर


 

नमस्कार दोस्तों!

मानव जागृति की इस अद्भुत यात्रा में आपका स्वागत है। अगर आपने भाग 1 और भाग 2 पढ़े हैं, तो जानते होंगे कि जागरण कैसे शुरू होता है और स्थिरता कैसे पकड़ता है। अब भाग 3 में हम गहराई की ओर बढ़ते हैं। यह चरण ऐसा है जहाँ जागरण सिर्फ ध्यान की कुर्सी तक सीमित नहीं रहता – यह आपके जीवन की हर सांस में उतरने लगता है। आइए, इस गहराई को समझें।


जीवन में उतरना: जागरण का विस्तार

तीसरे चरण में जागरण अब एक अभ्यास नहीं, बल्कि आपकी जीवनशैली बन जाता है। कल्पना कीजिए – आप बाजार में सब्जी खरीद रहे हैं, और बीच में भी आपका भीतर का साक्षी जाग्रत है। यह "जीवन में उतरना" ही जागृति का असली स्वरूप है।


बातचीत में जागरूकता: दोस्तों से गपशप कर रहे हैं, लेकिन अंदर से देख रहे हैं – "मैं बोल रहा हूँ, सुन रहा हूँ।" शब्द बाहर आते हैं, पर आप उनसे अलग रहते हैं।


काम के दौरान निरीक्षण: ऑफिस में रिपोर्ट टाइप कर रहे हैं, तो मन कहता है, "मैं कर रहा हूँ।" थकान आती है, लेकिन आप उससे उलझते नहीं।


भावनाओं से अलगाव: गुस्सा उबल रहा है? आप पहचानते हैं – "यह गुस्सा है, मैं नहीं।" क्रोध आता है, लेकिन उसकी जड़ें कमजोर पड़ जाती हैं।


भगवद्गीता की तरह, यह साक्षी भाव है – जैसे बादल आकाश से अलग हैं, वैसे ही भावनाएँ आपसे अलग हो जाती हैं।


जागरण के संकेत: छोटी घटनाओं में बड़ी पहचान

यह चरण छोटे-छोटे पलों में झलकता है। जागरण अब स्थिर हो चुका है, इसलिए यह हर जगह साथ चलता है।


छोटी घटनाओं में स्थिरता: ट्रैफिक जाम में फंस गए? जागरण बना रहता है – आप शांत रहते हैं, बिना बेचैन हुए।


भावनाओं की कमजोर पकड़: दुख आया, तो वह आया और चला गया। पहले वह घंटों लटकता था, अब मिनटों में।


विचारों का तीव्र प्रवाह: विचारों की बाढ़ आती है, लेकिन वे लंबे समय तक नहीं ठहरते। जैसे नदी का पानी बह जाता है।


ये संकेत बताते हैं कि आपका जागरण गहरा हो रहा है। योग वशिष्ठ कहते हैं, "जाग्रत पुरुष संसार में रहकर भी संसार से अलग रहता है।"


तैयारी: निरंतर जागरण की ओर

यह चरण आपको भाग 4 (निरंतर जागरण) के लिए तैयार करता है। अब जागरण सिर्फ 20 मिनट का ध्यान सेशन नहीं – यह आपका जीवन का हिस्सा बन गया है। रोजमर्रा की चुनौतियों में भी आप साक्षी बने रहते हैं।


एक छोटा प्रयोग: आज से हर घंटे 10 सेकंड रुकें। पूछें – "मैं कहाँ हूँ?" यह अभ्यास गहराई को और मजबूत करेगा।


निष्कर्ष: स्थिरता से गहराई तक की उड़ान

स्थिरता से गहराई की ओर बढ़ना ही जागरण की यात्रा का तीसरा चरण है। अब आपका जीवन जागृति का आश्रम बन चुका है। भाग 4 पढ़ें और देखें कैसे यह निरंतरता पकड़ता है।


क्या आप इस चरण को महसूस कर रहे हैं? कमेंट में बताएँ!

अगला भाग जल्द – जागृति की पूरी सीरीज़ (भाग 1-5) में हर भाग 2 मिनट का। सब्सक्राइब करें और शेयर करें। 🙏

Also read :भाग 1 & 2

द्रष्टा में स्थिरता

“मैं कौन हूँ?”

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जागरण का बीज — “मैं कौन हूँ?”

"जागो! जीवन का सच्चा आनंद इंतज़ार कर रहा है"

"क्या आप खुद को नए रूप में देखना चाहेंगे?"