माया के जाल से निकलकर जागृति तक का सफर
तुम्हें भी लगता है न, कि सब कुछ तुम्हारे हाथ में है?
जीवन में हम अक्सर यही सोचते हैं—'मैं ही करूँगा, मैं ही कर्ता हूँ।' लेकिन जब चीजें उल्टी पड़ जाती हैं, तब माया का पर्दा खुलता है। अचानक झटका लगता है, अहंकार चूर-चूर हो जाता है। यही वो पल है जब जागृति की चिंगारी जलती है। चलो, एक सच्चे उदाहरण से समझते हैं कि असल में क्या करना है।
रोज़ की ज़िंदगी का वो उदाहरण—छुट्टी का प्लान फेल!
कल्पना करो: तुम्हारी कंपनी में साल की छुट्टियाँ पड़ी हैं। नकद नहीं मिलेगा, तो सोचा—'शनिवार को छुट्टी ले लूँ, रविवार आराम। मेरा हक़ है न!' टिकट बुक, प्लान रेडी। लेकिन रविवार सुबह बॉस का कॉल: 'आज ऑफिस आना पड़ेगा, इमरजेंसी है।'
मन में क्या होता है?
गुस्सा: 'क्यों मेरे साथ ऐसा?'
खिन्नता: 'मेरा प्लान बर्बाद!'
दुख: 'सब व्यर्थ गया।'
यहाँ कर्म का भ्रम पकड़ा जाता है। तुमने छुट्टी लिया (कर्म), लेकिन रविवार का कॉल तुम्हारे कंट्रोल में नहीं था। सोचो—अगर तुम्हें पता होता कि बॉस कॉल करेगा, तो शायद प्लान ही न बनाते। यही माया है, जो हमें 'कर्ता' का भ्रम देती है।
ज्ञान क्या सिखाता है?
भगवद्गीता कहती है: अच्छा-बुरा मन में ही है। तुम समझते हो—'बॉस का कॉल तो बस काम है, दुख मन का बनाया।' लेकिन फिर भी सीने में जलन होती है न? ज्ञान से समझ आती है, पर दर्द कम नहीं। यहाँ रुकना नहीं—अब भक्ति का सहारा लो।
भक्ति कैसे काम करती है? वही छुट्टी वाला उदाहरण
महाभारत में अर्जुन को कृष्ण ने कर्म, ज्ञान, धर्म सब समझाया। अर्जुन की बुद्धि घूम गई, तब कृष्ण बोले:
"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।"
(सब छोड़कर मेरी शरण आ जा, मैं तेरे सारे पाप मिटा दूँगा।)
अब तुम्हारे छुट्टी वाले केस में: कॉल आने पर गुस्सा आए, तो मन में बोलो—'हे भगवान, ये तेरी लीला है। मैं कुछ नहीं, तू ही कर्ता है। सब तेरे हाथ में।' बस! गुस्सा पिघल जाता। मन हल्का। दुख? वो भाग गया। क्यों? क्योंकि तुमने 'मैं कर्ता हूँ' का अहंकार छोड़ दिया। स्वीकार कर लिया—परिणाम तेरी मर्ज़ी।
वास्तव में क्या करना है? स्टेप बाय स्टेप
कर्म करो: छुट्टी लो, प्लान बनाओ—बिना लगाव के।
ज्ञान लगाओ: समझो कि फल ईश्वर देगा, तुम नहीं।
भक्ति में शरण लो: विपरीत परिणाम आए तो 'तेरी भलमानी' बोलकर समर्पण कर दो।
अंत में यही संदेश
भक्ति और ज्ञान दुश्मन नहीं, दोस्त हैं। ज्ञान समझाता है, भक्ति शांति देती है। जीवन का हर ट्विस्ट—चाहे छुट्टी फेल हो, जॉब लॉस हो या रिश्ते का झगड़ा—यही सिखाता है: अहंकार छोड़ो, ईश्वर की शरण लो। जागृति हो जाएगी।
तुम्हारे साथ ऐसा हुआ है? कमेंट में बताओ!

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