मन क्यों ये तेरा शोर करे ?

 



भूमिका

कभी सोचा है, हमारा मन एक bazaar जैसा क्यों लगता है?

हर तरफ से आवाज़ आती है – “Assignment complete karo!”, “Notification check karo!”, “Serial का next episode देख लो!”, “Instagram pe kitne likes aaye?”. और फिर अचानक मन कहता है – “बस, अब शांति चाहिए।”

क्या आपको भी लगता है कि ये constant switching आपको थका देता है?

अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। यही तो असली गोलमाल है – एक तरफ productivity और discipline, दूसरी तरफ entertainment और relaxation.


मन का गोलमाल

Question to Readers:

क्या आपने कभी महसूस किया है कि एक काम शुरू करते ही मन अचानक किसी और चीज़ की तरफ खिंच जाता है?

Explanation:

ये मन की natural tendency है। Thoughts waves की तरह उठते हैं – एक पल में काम, दूसरे पल में gossip, तीसरे पल में social media. और हर app, हर notification तुम्हें अपनी तरफ खींचता है। यही खींच-तान हमें अंदर से restless बना देती है।


शांति की तलाश

Question to Readers:

तो क्या solution है? क्या शांति सिर्फ meditation camps या Himalaya की गुफाओं में ही possible है?

Explanation:

नहीं। शांति कोई luxury नहीं, बल्कि एक practice है।

Observation (अवलोकन): मन को बस देखना, बिना judge किए.

Micro-pauses: 30–60 second के छोटे breaks, बस सांस पर ध्यान.

Single-tasking: एक समय पर एक काम.

Acceptance (स्वीकार्यता): गोलमाल को दुश्मन नहीं, दोस्त समझो.


Question to Readers:

क्या आपने कभी consciously observe किया है कि आपका मन कितनी बार एक दिन में direction बदलता है?

Explanation:

अगर आप count करेंगे तो शायद आपको shock लगेगा। लेकिन यही awareness पहला step है।

This blog is a reminder that मन का शोर natural है. उसे control करना मुश्किल है, पर observe करना और accept करना possible है. Shanti ek destination नहीं, ek journey है


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