“क्या हमारी ज़िंदगी एक trap है?”
दोस्तो, मैं अभी 52 साल का हो गया लेकिन लगता है पूरी लाइफ़ मैंने बेकार की भाग-दौड़ में लगा दी। और सभी का ही प्लान यही होता है—एक अच्छा घर, car, और एक अच्छा title। लोगों की नज़र में उनका status होना चाहिए।
आजकल बहुत video, blogs और memes आपने देखे होंगे, कि mobile, काम और बेकार की भाग-दौड़ से कभी अपने, अपने अपनों और यार-दोस्तों के साथ कुछ time निकालो। Life को भी enjoy करो, वरना जब तुम उम्र के एक पड़ाव पर पहुँच कर थक जाओगे तब कोई अपना नहीं होगा जो तुम्हें time दे पाएगा।
कुछ time से बस यही सोचता रहा कि: बाहर क्या ढूँढते हो? बाहर क्या change करना चाहते हो? इससे क्या होगा या क्या मिलेगा? लेकिन जब successful लोगों को भी (बाहरी नज़र से) देखा तो वो भी कहीं न कहीं अंदर से बेचैन ही दिखाई देते हैं। कोई एक goal पूरा होते ही नया goal enter कर जाता है और फिर से वही दौड़ शुरू। और हर achievement की ख़ुशी कुछ ही लम्हों/दिनों तक सिमट जाती है।
इसलिए एक बात तो समझ आ चुकी थी—अंदर शांत हुए बिना कुछ नहीं होने वाला। इसलिए U-turn लेना ही एक सरल रास्ता है।
Stephen Hawking का Example
Stephen Hawking अपनी पूरी ज़िंदगी wheelchair पर रहे क्योंकि उन्हें ALS (Amyotrophic Lateral Sclerosis) नाम की एक गंभीर neurological बीमारी थी। यह motor neuron disease धीरे-धीरे उनके muscles को कमज़ोर करती गई और उन्हें चलने, बोलने और अपने शरीर पर नियंत्रण रखने की क्षमता खो देनी पड़ी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी intellectual capacity और advanced technology के सहारे black holes, universe और stars के बारे में groundbreaking theories दीं।
क्योंकि यही नियति का नियम है। ध्यान रखो—तुम जो सोचते हो “कि बस ऐसा हो जाए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा”, यह trap है ज़िंदगी का।
सोचना चाहिए कि “मैं ही राजा हूँ, सब कुछ मेरा है।” जो भी नियति ने मेरे लिए चुना उसे कोई कैसे बदल सकता है? यही सोच आपका पूरा जीवन बदल सकती है।
खुद पर विश्वास रखो, खुश रहो और यही एकमात्र सोच बैठाओ कि “I am perfect.”
कभी तो अपने लिए time निकालो, दिमाग़ के शोर से दूर हटो और सोचो—क्या चाहिए तुम्हें?

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