हमारी सबसे बड़ी समस्या?


हमारी सबसे बड़ी समस्या वो है, जो जानें-अनजाने में हर कोई जानता है। लेकिन जितनी कठिन लगती है, उतनी ही आसान है इसे पार करना। जैसे ही इसे जानते हैं, पता चलता है—समस्या बाहर नहीं, भीतर है।


एक कहावत है ना, राई का पहाड़ बना देना। बस, एक छोटी सी समस्या को हम सोच-सोचकर सबसे बड़ा बना देते हैं। फिर शुरू होता है पीछा छुड़ाने का खेल। हम खुद को कमजोर बना देते हैं और दूसरों को इतना बड़ा, जैसे वही संकटमोचन हो। 

ओह, इतना बोला लेकिन समस्या क्या है, उस पर तो बात ही नहीं की...


अष्टावक्र का जनक को पहला उपदेश: विषयों को विष के समान छोड़ दो।


यही है हमारी सबसे बड़ी समस्या—विषय (Subject)। 

हम अच्छे-भले बैठे हैं, और thought आता है: कल अगर बॉस ने कुछ कहा तो मैं भी बोल दूंगा...। फिर generation शुरू: बॉस ज्यादा गुस्सा हो गया तो? नौकरी से निकाल दिया तो? EMI, बच्चों की फीस, इन्वेस्टमेंट withdraw करना पड़ेगा, नया घर कैसे लूंगा?


मतलब, एक नन्हा सा thought और lo—बन गई सबसे बड़ी समस्या! 

तो क्या thoughts आना बंद नहीं हो सकते? 

बिल्कुल नहीं। आपका अपने ऊपर control कहां है—न सांसों पर, न thoughts पर, न इंद्रियों पर।


अगर पहले स्टेज पर ही thought को छोड़ दिया होता, तो ये BP shoot का कारण ही न बनता। अरे हां, यही तो था हमारा विषय, जिससे चिपक गए और जीवन का जंजाल बन गया।


जीवन को सहजता से जीने की कला यही है। जो इसे सीख ले, सारी समस्याएं छोटी हो जाती हैं। 

बुद्ध ने कहा था ना—अपना दीपक स्वयं बनो।


छोटे-छोटे टारगेट बनाओ: अभी 5 मिनट के लिए सिर्फ thought को देखो, किसी से चिपको मत। दिन में 5-7 बार ये exercise की आदत डाल लो—यकीन मानो, ये सहजता से संस्कार बन जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा। 

Pro tip : Treat thoughts like notifications—swipe left, don't engage!


Best of luck, good day and wish you all the best. 

अपना अनुभव कैसा लगा, कमेंट में जरूर बताना!


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