प्रकृति से ब्रह्मांड तक — आखिर सब कहाँ समा जाता है?
प्रकृति से ब्रह्मांड तक — आखिर सब कहाँ समा जाता है? हम अक्सर प्रकृति को अलग-अलग हिस्सों में देखते हैं। एक छोटा-सा बीज… एक पेड़… उस पेड़ पर रहने वाली गिलहरी… गिलहरी को अपना भोजन बनाने वाला कोई दूसरा जीव… धरती… सूर्य… आकाशगंगा… और फिर अनंत ब्रह्मांड। लेकिन अगर इन सबको एक साथ देखा जाए, तो एक अद्भुत बात सामने आती है— क्या इस संसार में वास्तव में कुछ भी पूरी तरह अलग है? शायद प्रकृति की सबसे बड़ी कहानी यही है कि हर अस्तित्व किसी न किसी बड़े अस्तित्व का हिस्सा बनता जाता है। 🥜 एक छोटे से Nut से शुरू होने वाली कहानी कल्पना कीजिए, जंगल की जमीन पर एक छोटा-सा Nut पड़ा है। एक गिलहरी आती है और उसे खा जाती है। अब वह Nut अलग अस्तित्व नहीं रहा। उसकी ऊर्जा गिलहरी के शरीर का हिस्सा बन गई। यानी जो चीज हमें अलग दिखाई दे रही थी, वह किसी दूसरे जीवन का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। 🐿️ गिलहरी भी किसी और का हिस्सा बनती है जंगल में हर जीव अपने आप में पूरी कहानी नहीं है। गिलहरी किसी दूसरे जीव के लिए भोजन बन सकती है। वह ऊर्जा आगे किसी और जीव के शरीर का हिस्सा बन सकती है। फिर वही ऊर्जा ...